Monday, March 27, 2017

अधूरा सपना

फिर मांझी का साथ, मझधार में छूटा है
फिर एक तारा आसमान से टूटा है
यूँ तो कई सपने होते हैं दिल बहलाने को
पर फ़िर एक बार सबसे प्यारा सपना टूटा है
अधूरा-सपना-by-Ankesh-Kumar-Shrivastava
आदतें हैं इस दिल की जो छूटती ही नहीं
कैसे जी पाउँगा उसके बिना, वो कभी पूछती ही नही
शाम की तलाश करता रहा ज़िंदगी भर
अब शाम कुछ यूँ मिली है के रात भी होती नही
टूटते तारों में ढूंढता हू अब अपने निशान
पर अंधेरो ने अब है ऐसा घेरा के तारे भी अब दिखते नही
लगती थी जो बातें दिल को भली
अब उन बातों से मन भी बहलता नही
एक मंज़िल थी जो खो गई, एक आस थी जो सो गई
बढ़ चुका हू अब इतना आगे के आगाज़ के निशान भी दिखते नही
टूट टूट के बिखर रहा हूँ अब रात दिन
पर जो हाथ देता था सहारा, वो भी अब है साथ नही
अकेले बढ़ना है अब इन राहों पे
रहना है अब सबसे होके जुदा
बस मिले इतनी ताक़त के चल सकूँ अकेले
कर दूं अपने आप को तबाह, बस हो न इतनी खता...|

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