Wednesday, April 29, 2015

तेरी आँखें

कुछ सुर्ख सी कुछ ख़ामोश सी
सब कुछ कह जाने को बेताब सी
कभी इधर कभी उधर कुछ तलाशती
ये आँखें तेरी बिन कहे सब कुछ कह जाती
तेरी आँखें by Ankesh Kumar Shrivastava
कभी इठलाती कभी इतराती
कभी खुद में ही शर्मा जाती
कभी शैतान सी कभी नादान सी
ये आँखें तेरी बिन कहे सब कुछ कह जाती
पलकों के पीछे से निहारती
सितारों की तरह जगमगाती
शर्मा के फिर पलकों में छुप जाती
ये आँखें तेरी बिन कहे सब कुछ कह जाती
कभी झूमती कभी ठिठक जाती
बिना बात ही खिलखिलाती
कभी एक अजनबी एहसास दिलाती
ये आँखें तेरी बिन कहे सब कुछ कह जाती
ख़यालो में गुम सी कभी
शरारातो में मशगूल सी कभी
मुझे तेरी ओर खींच लाती
ये आँखें तेरी बिन कहे सब कुछ कह जाती...!!

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